
लोकमाता, कभी-कभी जब मैं समय पर भोजन नहीं करता था, तो आप मुझे डाँटते हुए अपने पास बिठाकर खाना खिलाती थीं। जब भी मैं फ़र्रुखाबाद से कानपुर के लिए निकलता, तब तक आपको चैन नहीं पड़ता था जब तक मेरा संदेश या फोन न आ जाए कि मैं सकुशल पहुँच गया हूँ। आपका स्नेह केवल मार्गदर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें एक माँ की चिंता, ममता और अपनापन समाहित था। जब भी मुझसे कोई भूल होती, आप मुझे डाँटकर सही मार्ग दिखाती थीं। आपके शब्दों में कठोरता नहीं, बल्कि मेरे भविष्य की चिंता और मेरे व्यक्तित्व को बेहतर बनाने की आकांक्षा होती थी। हमारी अनगिनत बातचीतों का केंद्र सदैव फ़र्रुखाबाद रहा। आप घंटों इस विषय पर चर्चा करती थीं कि फ़र्रुखाबाद का पुनरुत्थान कैसे हो सकता है, यहाँ के युवाओं को निःशुल्क UPSC कोचिंग कैसे उपलब्ध कराई जा सकती है, बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा कैसे दी जा सकती है, और जिले को विकास की नई ऊँचाइयों तक कैसे पहुँचाया जा सकता है। आपने अपना जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि फ़र्रुखाबाद और उसके लोगों के लिए जिया। आज आपके जाने के बाद ऐसा प्रतीत होता है मानो फ़र्रुखाबाद अनाथ हो गया हो। जिस लोकमाता ने हजारों लोगों को अपना स्नेह, संरक्षण और दिशा दी, वह आज हमारे बीच नहीं हैं। यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक युग की क्षति है। मुझे आज भी हमारी वह अंतिम मुलाकात याद है, जब आप दिल्ली के लिए रवाना हो रही थीं। आपने मुझे अपने पास बुलाकर फिर वही प्रश्न पूछा था—“फ़र्रुखाबाद की बेहतरी कैसे हो सकती है?” मैंने सहज ही उत्तर दिया था, “जब तक आप हैं, सब संभव है।” तब आपने मुस्कुराकर कहा था, “मैं कब तक रहूँगी?” और मैंने बिना एक पल सोचे कहा था, “आप हमेशा रहेंगी।” यदि मुझे ज़रा भी आभास होता कि वह हमारी अंतिम मुलाकात होगी, तो शायद मैं आपको दिल्ली जाने ही न देता। जीवन में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जिन्हें हम हमेशा के लिए रोक लेना चाहते हैं, और वह क्षण मेरे लिए ऐसा ही था। आपके मेरे लिए कहे गए अंतिम शब्द आज भी मेरे कानों में गूँजते हैं—“भूख तो नहीं लगी बेटा, खाना खा लो।” यही तो आपका व्यक्तित्व था। अपने अंतिम दिनों तक भी आपको स्वयं की नहीं, दूसरों की चिंता थी। आपका जाना मेरे जीवन की सबसे बड़ी व्यक्तिगत क्षतियों में से एक है। आपने मुझ पर जो विश्वास किया, वह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं था। आप हमारे बीच भले ही शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन आपके विचार, आपके संस्कार, आपका स्नेह और फ़र्रुखाबाद के लिए आपका सपना सदैव हमारे साथ रहेगा। ईश्वर आपको अपने श्रीचरणों में स्थान दें। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
This post was published on 07th June, 2026 by Vaibhav singh on his Instagram handle "@vaibhavrathoree (VAIBHAV SINGGH RATHORE)". Vaibhav singh has total 3.6K followers on Instagram and has a total of 377 post.This post has received 199 Likes which are greater than the average likes that Vaibhav singh gets. Vaibhav singh receives an average engagement rate of 4.03% per post on Instagram. This post has received 3 comments which are lower than the average comments that Vaibhav singh gets. Overall the engagement rate for this post was lower than the average for the profile.